🎂जन्म की तारीख और समय: 18 अगस्त 1934 , दिना, पाकिस्तान
पत्नी: राखी गुलज़ार (विवा. 1973)
बच्चे: मेघना गुलज़ार
पोता या नाती: समय संधू
इनाम: साहित्य अकादमी पुरस्कार (2002), पद्म भूषण (2004),

गुलज़ार यानि सम्पूर्ण सिंह कालरा का जन्म 18 अगस्त 1936 को दीना, झेलम जिला, पंजाब, ब्रिटिश भारत – अब पाकिस्तान में हुआ था। उनके पिता का नाम माखन सिंह कालरा और उनकी माता का नाम सुजान कौर था। गुलज़ार अपने पिता की दूसरी पत्नी की इकलौती संतान हैं। बचपन में ही गुलजार मां का देहांत हो गया था। देश के विभाजन के वक्त उनका परिवार पंजाब के अमृतसर में बस गया। वहीं गुलजार साहब मुंबई चले आए। मुंबई में उन्होंने एक गैरेज में मैकेनिक का काम शुरू कर दिया। वह खाली समय में नाटकीय ढंग से कविताएं रचने लगे। इसके बाद उन्होंने गैरेज का काम छोड़ हिंदी सिनेमा के मशहूर निर्देशक बिमल राय, हृषिकेश मुखर्जी और निखिल कुमार के सहायक के रूप में काम करना शुरू कर दिया।
उनकी शादी अभिनेत्री राखी गुलज़ार के साथ हुई , हालाकि दोनो की शादी बहुत दिनो खुशहाल तो नही रह सकी लेकिन गुलजार साहब और राखी ने कभी भी एक-दूसरे से तलाक नहीं लिया। उनकी एक बेटी का नाम मेघना गुलजार हैं, जोकी एक फिल्म निर्देशिका हैं।
साल 1968 में उन्होंने फिल्म आशीर्वाद का संवाद लिखा। इस फिल्म में अशोक कुमार नजर आये थे। इस फिल्म के लिए अशोक कुमार को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार भी मिला था। इसके बाद उन्होंने कई बेहतरीन फ़िल्मों के फ़िल्मों के बोल लिखे जिससे वे हमेशा आलोचकों और दर्शकों की वाहवाही लूटते रहे। साल 2007 में उन्होंने हॉलीवुड फिल्म स्लैमडॉग मिलेनियर का गाना जय हो लिखा। उन्हें इस फिल्म के ग्रैमी अवॉर्ड से भी नवाजा गया। उन्होंने निर्देशन में भी हिंदी सिनेमा में अपना बहुत योगदान दिया है। उन्होंने अपने निर्देशन में कई बेहतरीन फिल्में दर्शकों को दी हैं। जिन्हे दर्शक आज भी देखना पसंद करते हैं। उन्होंने बड़े स्टार्स के अलावा छोटे स्टार्स के लिए भी काफी कुछ लिखा है। जिन्मे दूरदर्शन का शो जंगल बुक भी शामिल है।
रचना संग्रह
कुछ और नज़्में – नज़्म संग्रह
छन्या-छन्या – गजल संग्रह
यार जुलाहे – नज़्म एवं ग़ज़ल संग्रह
त्रिवेणी – त्रिवेणी संग्रह
पुखराज – नज़्म एवं त्रिवेणी संग्रह
रात पश्मीने की – नज़्म एवं त्रिवेणी संग्रह
चौरस रात – लघु कथाएँ, 1962
जन्म-कविता संग्रह, 1963
एक बूंद चाँद -कविताएँ, 1972
रावी पार -कथा संग्रह, 1997
रात, चाँद और मैं -2002
ख़ैरशें -2003
प्रतिनिधि रचनाएँ
किस क़दर सीधा सहल साफ है यह रास्ता देखो
अभी न पर्दा गिराओ, बाकी, कि दास्ताँ आगे और भी है
ज़ुबान पर ज़ायका आता था जो सफ़हे पलटने का
हमें प्रेमियों की पोशाकों से ऐसी-सी खबर तो मिल ही जाती है
दरख़्त रोज़ शाम का बुरा दिन के शाखों में
एक नदी की बात…
बारिश आने से पहले
मेरे खैदान में एक कबूतर
मकान की ऊपरी मंजिल पर
माँ उपले थापा करती थी
किताबें झाँकती हैं
यारम
बोलिये सुरीली बोलियाँ
बड़ी परेशानी होती है
प्यार वो बीज है
बस एक लम्हे का मुकाबला था
गंतव्य खोज करता है
हमको मन की शक्ति
पूरा दिन
रात बदे दबे पाँव चली जाती है
देखो, आहिस्ता चलो
ख़ुदकुशी
इक इमारत
अभी न परदा गिराओ, प्रदेशो
जगजीत: एक बहार था वो…
खाली कागज़ पे क्या ढूँढ़ते हो?
न आने की आहट
मेरा कुछ सामान
जय हो
सपना रे सपना
काली काली
रोको मत टोको मत
जंगल जंगल पता चला है
रिटर्न मैं
तोते गए उड़ गए
टैग
बस एक चुप सी लगी है
चौदहवीं रात इस चाँद का इतिहास
सितारे लटके हुए हैं टैगों से आसमान पर
पूरा का पूरा आकाश कुँवर कर
ज़िहाल-ए-मिस्किन मुक़ून बा-रंजिश
गुलज़ार की त्रिवेणियाँ
मुझे भी तर्कीब सिखाया
हिंदुस्तान में दो दो हिंदुस्तान दिखाई देते हैं
बैल
रोशनी यूँ हुई बसर तन्हा
आदतन तुमने दिया कर वादा
आँखों में जल रहा है क्यूँ बुझता नहीं धुआँ
चलो ना भटके
दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई
एक परवाज़ दिखाई देता है
एक पुराना मौसम याद आया भरी पुरवाई भी
छूट हाथ भी तो वैकल्पिक नहीं
मैं अपने घर में अजनबी ही हो गया हूँ
नज़्म उलटी हुई है सीने में
किदम एक ही मोड़ पर जमे हुए हैं
साँस लेना भी कैसी आदत है
शाम से आँख में दवा सी है
उदास नहीं
स्पर्श
वो खतरे के पुर उड़ रहा था
इक जरा सीखना ही दो तुम
तू मृत्यु एक कविता है
अफ़सोसने
रात भर सर्द हवा चलती रही
वो जो शायर था चुप सा रहता था
भूदृश्य-1
भूदृश्य-2
पेंटिंग-1
चित्रकारी-2
पेंटिंग-3
संस्थाएँ
वैन गॉग का एक ख़तरा
कुछ और मंज़र-1
ऍम
अमलतास
ख़ुमानी, पैन!
प्राय: बस विकल्प होते हैं
एक में दो
कुछ खो दिया है पाइके
किताबें झांकती हैं बंद आलमारी के शीशों से
समय आने पर न जाएं न देखें
सितारे लटके हुए हैं टैगों से आसमान पर
बर्फ़ पिघलेगी जब पहाड़ों से
प्रमुख फ़िल्में और टीवी सीरियल
आँधी – 1975
इजाज़त -1987
माचिस -1996
हु तू तू -1999
सीज़न- 1975
दाम- 1982
परिचय – 1972
कोशिश – 1972
लेकिन – 1990
राज़ी – 2018
मेरे अपने – 1971
आख़िर – 1975
वर्ष 1977
किताब – 1977
क्वेश्चन – 1982
अचानक – 1973
लिबास – 1988
दस कहानियाँ – 2007
रुदाली – 1993
जस्ट मैरिड – 2007
मासूम -1983
आनंद – 1971
ओके जानू – 2017
साथिया – 2002
ख़ाकी – 1970
गुड्डी – 1971
मीरा – 1979
बसेरा – 1981
मिर्ज़ा – 2016
इश्क़िया – 2010
बावर्ची -1972
आशीर्वाद – 1968
नमक हराम – 1973
खुबसूरत – 1980
आख़िर इश्क़िया – 2014
अदृश्य दृश्य – 1975
सदमा- 1983
घरौंदा – घरौंदा -1977
बंदिनी- 1963
किल दिल – किल दिल – 2014
फूलों की छाँव में – 1977
दो दूनी चार – 1968
जरा सी रोशनी -1983
इब्राहिम की टैगलाइन -1971
एक अकार -1985
फ़रार- 1975
अनिताये – 1984
एक पल -1986
क्या दिल्ली क्या लाहौर – 2014
टीएटी 420 – 1997
गृहप्रवेश -1979
मिर्ज़ा ग़ालिब -1988
अभिनय -1993
जंगल बुक
गीत
कभी यूं भी तो हो – ख्वाहिश – एक सपना सच हुआ · 2012
सिंगार को रहने दो – टैगोर के साथ बातचीत में गुलज़ार · 2016
तुझसे नाराज़ नहीं ज़िन्दगी – मासूम · 1960
बुझ गया था क्यों दिया – टैगोर के साथ बातचीत में गुलज़ार · 2016
नखरीले – किल दिल · 2014
रूह देखी है कभी – नज़्म, खंड। 1 और 2 · 2012
जगह नहीं अब डेयरी में – नज़्म, खंड। 1 और 2 · 2012
एक कली दो पत्तियाँ – मैं और मेरा साया · 1993
मैं घूमता हूं – टैगोर के साथ बातचीत में गुलज़ार · 2016
सुनेहरी कूंजे जब – नज़्म, वॉल्यूम। 1 और 2 · 2012
कभी-कभी जब मैं बैठ जाता हूँ – नज़्म, वॉल्यूम। 1 और 2 · 2012
अगर ऐसा भी हो सकता – नज़्म, खंड। 1 और 2 · 2012
किल दिल – स्वीटा · 2014
तेरे आँखों से ही – नज़्म, वॉल्यूम। 1 और 2 · 2012
रात भर सर्द हवा चलती रही – नज़्म, खंड। 1 और 2 · 2012
ख़लाओं में तैरते जज़ीरों में – नज़्म, खंड। 1 और 2 · 2012
कब आते हो – Kab Aate Ho · 2005
ओस पड़ी थी रात बहुत – नज़्म, खंड। 1 और 2 · 2012
खोल कर बाहों के दो – नज़्म, खंड। 1 और 2 · 2012
एक लम्स हल्का सुबुक – नज़्म, खंड। 1 और 2 · 2012
सिर्फ एहसास के पास हो तुम – नज़्म, वॉल्यूम। 1 और 2 · 2012
उस दिन की बात है – मैं और मेरा साया · 1993
याद है एक दिन – नज़्म, खंड। 1 और 2 · 2012
माफिया प्रेम
सांस लेना भी – गुलज़ार की नज़्म · 2012
बारिश – भारत संगीत सप्ताह · 2013
बस एक ही सुर में एक ही लाया पे – नज़्म, खंड। 1 और 2 · 2012
पहले से क्या लिखा था – नज़्म, खंड। 1 और 2 · 2012
वो खत के पुरज़े – मरासिम · 1999
दिन कुछ ऐसे गुज़रता है कोई – नज़्म, खंड। 1 और 2 · 2012
गुलज़ार बोलते हैं – सेहमा सेहमा -मरासिम · 1999
कच्चे रंग
पुरस्कार
वर्ष 1972 में ‘कोशिश’ फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ स्क्रीनप्ले पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
वर्ष 1975 में ‘मौसम’ फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशित पुरस्कार से नवाजा गया।
वर्ष 1987 में ‘इजाज़त’ फ़िल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ रिकार्डर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
वर्ष 2009 में फ़िल्म ‘स्लैमडॉग मिलेयर’ में उनके गीत ‘जय हो’ को ऑस्कर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए वर्ष 2004 में उन्हें देश के तीसरे बड़े नागरिक सम्मान पद्मभूषण से भी सम्मानित किया गया।
इसका अतिरिक्त गुलज़ार वर्ष 2002 में ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार’ में भी मिल चुका है।
वर्ष 2013 के लिए सुपरस्टार चार दशकों से भारतीय सिने प्रेमियों को अपने रेस्ट का दीवाना बनाने वाले प्रसिद्ध संगीतकार गुलज़ार को दादा साहब फाल्के पुरस्कार दिया गया है। गुलजार यह सम्मान पाने वाले 45वें राजनेता हैं।
इसके अतिरिक्त उन्हें 1977, 1979, 1980, 1983, 1988, 1991,1998, 2002, 2005 आदि में सर्वश्रेष्ठ फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला।