खलनायक मनमोहन

हिंदी सिनेमा के एक ऐसे एक्टर थे जो खलनायक की भूमिका के लिए जाने जाते थे.
🎂28 जनवरी 1933 जमशेदपुर में
⚰️26 अगस्त 1979
मनमोहन का निधन हो गया था. जब तक रहे शान की जिंदगी जिए।
मनमोहन ने हिंदी के अलावा बंगाली, गुजराती और पंजाबी फिल्मों में भी काम किया
शंकर-जयकिशन के करीबी माने जाने वाले मनमोहन ने बतौर खलनायक फिल्म इंडस्ट्री में ऐसा सिक्का जमाया था कि एक ही महीने में 14 फिल्में प्रदर्शित हुई थीं. कभी किसी को काम के लिए मना नहीं करने वाले मनमोहन को यारों का यार माना जाता था. बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना, धर्मेंद्र, संजीव कुमार, जितेंद्र, सुजीत कुमार के करीबी दोस्त मनमोहन ने अपनी दोस्ती की वजह से ही विनोद खन्ना की फिल्मों में एंट्री करवाई थी.
सिनेमा में जितनी जरूरत एक हीरो की होती है, उतनी ही जरूरत एक विलेन की भी होती है या यूं कहें कि बिना विलेन के हीरो का क्या काम इसलिए इंडस्ट्री में जितना मान-सम्मान हीरो ने कमाया है उतना ही विलेन ने भी कमाया है। इंडस्ट्री ने भी एक से बढ़कर एक विलेन दिए हैं। विलेन की लिस्ट में ऐसे कई नाम हैं जिन्होंने काफी नाम और शोहरत कमाई है। इसी लिस्ट में शुमार हैं एक्टर मनमोहन।
मनमोहन ने बतौर खलनायक फिल्म इंडस्ट्री में ऐसा सिक्का जमाया था कि एक ही महीने में एक या दो नहीं बल्कि पूरी 14 फिल्में रिलीज हुई थीं। दरअसल उनके बारे में कहा जाता है कि वे कभी किसी को काम के लिए मना नहीं कर पाते थे। उनके करीबी बताते थे कि उन्हें बचपन से ही एक्टिंग का बड़ा शौक था। मनमोहन के भतीजे विनय ने एक बार मीडिया को बताया था कि ‘जमशेदपुर में साकची के आम बागान में उस दौर के मशहूर कॉमेडी एक्टर मुकरी, टुनटुन का एक प्रोग्राम होना था। वहां एक होटल में ये टीम ठहरी हुई थी।
इसकी जानकारी जब मनमोहन को मिली तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। एक्टिंग के शौकीन मनमोहन होटल पहुंच गए और इन मशहूर कलाकारों की खूब खातिरदारी की। मनमोहन के इस एक्ट से सभी लोग इतना खुश हो गए थे कि अपने साथ ही मुंबई लेकर चले गए। फिर क्या था मनमोहन ने ‘शहीद’, ‘जानवर’, ‘गुमनाम’, ‘अराधना’, ‘हमजोली’, ‘क्रांति’, ‘अमर प्रेम’ जैसी फिल्मों में शानदार अदाकारी का जबरदस्त सिक्का जमाया लिया था।

Satishmudar द्वारा प्रकाशित

हिंदी पंजाबी गाने सुनना पसंद है

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